हम पहले ही बेहतर थे

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जिंदगी का खेल है बड़ा अनोखा
ऐसे सपने कभी-कभी दिखाती है
करवा देती है यथार्थ को अनदेखा
ऐसी मुस्कराहट कभी-कभी दे जाती है
कर देती है रसगुल्ला की मिठास को भी फीका
मसखरे को आशिक बना जाती है  ||

जिंदगी का खेल है बड़ा असोचा
ऐसे मीठे सपनों को अक्सर वो अहिस्ते से तोड़ जाती है
ऐसे लम्हों में हमें अपने पीछे दिखती है मुर्खता की रेखा
ऐसे पलों में तो मुस्कराहट भी दर्द दे जाती है
ना जाने ऐसे लम्हों में हमने ऐसा कितनी बार यह सोचा
हम पहले ही बेहतर थे
हाँ जिंदगी, तेरे सपने दिखने और तोड़ने के खेल से पहले,
हाँ, हम पहले ही बेहतर थे ||

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