उलझे सवाल

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दिल में अरमान तो कई थे
लेकिन काबिलियत पे सवाल भी कई थे
आखिर ऐसे सवाल पूछने वाले कौन थे
ऐसे भ्रमित सवाल पूछने वाले हम ही तो थे ||

 

ज़हन में गूँज रही थी कुछ करने की आशा
लेकिन कर रहें हैं उस आवाज़ को अनसुना
बंद आँखों से देख रहें हैं दुनिया का तमाशा
भूल चुके हैं की हमने कभी कोई सपना बुना ||

याद आ रहा है एक फ़िल्मी गाना
‘जिंदगी एक सफ़र है सुहाना
यहाँ कल क्या हो किसने जाना’
लेकिन असलियत क्या छिपाना
जिंदगी का सफ़र है एक बहाना
आखिर में सबको कब्र में ही है जाना ||

ऐसे ख्यालों ने ना जाने कितनों को किया बेगाना
लेकिन क्या छोड़ दिया जाए इनके कारण मुस्कुराना
ऐसे उलझे सवालों की खोज ने कर दिया है हमें नाकारा
लेकिन हमारी उलझन देख मुस्कुरा रहा है जग सारा ||

 

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