उलझे सवाल

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दिल में अरमान तो कई थे
लेकिन काबिलियत पे सवाल भी कई थे
आखिर ऐसे सवाल पूछने वाले कौन थे
ऐसे भ्रमित सवाल पूछने वाले हम ही तो थे ||

 

ज़हन में गूँज रही थी कुछ करने की आशा
लेकिन कर रहें हैं उस आवाज़ को अनसुना
बंद आँखों से देख रहें हैं दुनिया का तमाशा
भूल चुके हैं की हमने कभी कोई सपना बुना ||

याद आ रहा है एक फ़िल्मी गाना
‘जिंदगी एक सफ़र है सुहाना
यहाँ कल क्या हो किसने जाना’
लेकिन असलियत क्या छिपाना
जिंदगी का सफ़र है एक बहाना
आखिर में सबको कब्र में ही है जाना ||

ऐसे ख्यालों ने ना जाने कितनों को किया बेगाना
लेकिन क्या छोड़ दिया जाए इनके कारण मुस्कुराना
ऐसे उलझे सवालों की खोज ने कर दिया है हमें नाकारा
लेकिन हमारी उलझन देख मुस्कुरा रहा है जग सारा ||

 

जान-पहचान

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चुन्नू और मुन्नू बस-स्टैंड पर खड़े थे | शायद वो बस का इंतज़ार कर रहे थे या शायद वो मुन्नी का इंतज़ार कर रहे थे | मुन्नी आई| मुन्नू उसे देख कर मुस्कुराया | मुन्नी ने उसे मुस्कुराते हुए देखा और फिर अपनी नज़र पलट कर किया उसे अनदेखा | चुन्नू ने मुन्नू को मुन्नी को देख मुस्कुराते हुए देखा और मुन्नी को मुन्नू के मुस्कराहट से मूँह फेरते हुए देखा|

बस आई| वो चली गई |  अब चुन्नू ने मुन्नू से शरारत भरी मुस्कान के साथ पूंछा “तुम तो कहते थे की तुम्हारी उससे जान-पहचान है लेकिन उसने तो तुम्हे देख कर मूँह फेर लिया” |

मुन्नू:“हाँ, क्यूंकि वो मुझे जानती नहीं है|”

चुन्नू: “हैं? भईया पहेली मत बुझाओ | तो तुम्हारी जान-पहचान कैसे हुई, यह बस बताओ |”

मुन्नू: “जान-पहचान का रिश्ता तो है | बताता हूँ कैसे | मैं उसे अपनी जान समझता हूँ और उसे मुझ जैसे सड़कछाप आशिकों की बहुत अच्छी तरह से पहचान है | तो हो गई ना जान-पहचान |”

चुन्नू: “मान गए उस्ताद | रिश्ते बनाने में तो आप बाप हो| आज से तो मेरी जान-पहचान भी कई लोगों के साथ बढ़ गई|”

हम पहले ही बेहतर थे

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जिंदगी का खेल है बड़ा अनोखा
ऐसे सपने कभी-कभी दिखाती है
करवा देती है यथार्थ को अनदेखा
ऐसी मुस्कराहट कभी-कभी दे जाती है
कर देती है रसगुल्ला की मिठास को भी फीका
मसखरे को आशिक बना जाती है  ||

जिंदगी का खेल है बड़ा असोचा
ऐसे मीठे सपनों को अक्सर वो अहिस्ते से तोड़ जाती है
ऐसे लम्हों में हमें अपने पीछे दिखती है मुर्खता की रेखा
ऐसे पलों में तो मुस्कराहट भी दर्द दे जाती है
ना जाने ऐसे लम्हों में हमने ऐसा कितनी बार यह सोचा
हम पहले ही बेहतर थे
हाँ जिंदगी, तेरे सपने दिखने और तोड़ने के खेल से पहले,
हाँ, हम पहले ही बेहतर थे ||